पूज्य बापू का दृढ़ विश्वास था कि जबतक भारत के गांव मजबूत नहीं होंगे तबतक भारत का तेज़ विकास नहीं हो पायेगा। देश में पंचायती राज की परिकल्पना के पीछे यही भावना है। बीते दशक में पंचायतों को सशक्त करने एक के बाद एक कदम उठाए गए हैं। टेक्नोलॉजी के माध्यम से भी पंचायतों को मजबूत किया गया है।
01.01.1970 View Event
हमारे बारे में
पंचायती राज मंत्रालय राज्यों में विकेंद्रीकरण और स्थानीय शासन की वर्तमान में चल रही प्रक्रिया की देखभाल करता है। किसी संघवाद में, सरकार की शक्तियाँ और कार्य दो सरकारों के बीच विभाजित होते हैं। भारत में ये सरकारें संघ सरकार और विभिन्न राज्य सरकारें हैं। किंतु, 1993 में भारत के संविधान के 73वें और 74वें संशोधन अधिनियम के पारित होने के साथ, शक्तियों और कार्यों का विभाजन स्थानीय स्वशासनों (ग्राम स्तर पर पंचायत और नगरों एवं बड़े शहरों में नगरपालिकाएं तथा नगर निगम) तक किया गया है। इस प्रकार, भारत की संघीय व्यवस्था में अब दो नहीं, बल्कि तीन स्तरीय सरकारें कार्य करती हैं। पंचायती राज मंत्रालय, पंचायती राज और पंचायती राज संस्थाओं से संबंधित सभी मामलों को देखता है। इसे मई 2004 में स्थापित किया गया था। मंत्रालय का मार्गदर्शन कैबिनेट स्तर के मंत्री करते हैं। मंत्रालय का नेतृत्व व मार्गदर्शन इस समय पर श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह जी कर रहे हैं।
प्रमुख प्रस्ताव
- पुरस्कार विजेता पंचायतों की सर्वोत्तम प्रथाएं -2025
- पंचायती राज मंत्रालय में एक सलाहकार (सेवानिवृत्त संयुक्त सचिव और उससे ऊपर के स्तर के अधिकारी) की रिक्ति परिपत्र-के संबंध में।
- एनपीए-2024 पुरस्कार विजेताओं का विवरण
- पंचायती राज मंत्रालय में 10 परामर्शदाताओं (सेवानिवृत्त) की नियुक्ति हेतु रिक्ति परिपत्र
- राष्ट्रीय पंचायत प्रोफ़ाइल
हाल के दस्तावेज़
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